नियति का विधान
©डॉ. चंद्रकांत तिवारी
जब चाँद बादलों में खो जाता, तब याद सुखद वह आता है,
उजियारे में उसकी कीमत कौन भला बतलाता है।
जब राहों पर छा जाता तम, हर पथिक भरम-सा जाता है,
तब चाँद-सा एक सहारा ही जीवन-पथ दिखलाता है।
अपने दुःख के एकांतों में मन कितना घबराता है,
सुख का सारा वैभव पल में आँखों से ओझल हो जाता है।
सब अपनी करनी का ही फल, समय हमें समझाता है,
भाग्य में जो लिखा न हो, मिलकर भी न मिल पाता है।
भले दिनों की छाँव कभी पलभर में धूप बन जाती है,
जीवन की हर मुस्कान यहाँ नियति की चाल बताती है।
जो विधि ने लिखा ललाट पर, वही अंततः फल पाता है,
भाग्य में जो लिखा न हो, मिलकर भी नहीं मिल पाता है।
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