तुम्हारे घर के पास (कविता)
©डॉ. चंद्रकांत तिवारी
तुम्हारे घर के पास
एक सड़क है—
जो किसी नक़्शे में
सिर्फ़ सड़क है,
पर मेरी स्मृतियों में
वह आज भी धड़कती हुई नस है।
उस पर चलते हुए
मैंने कई बार
अपने कदमों की आहट से अधिक
अपने मौन को सुना है।
तुम्हारे घर के पास
एक गुलमोहर है।
वह हर साल
लाल हो जाता है,
पर किसी ने कभी नहीं पूछा—
फूल खिलते हैं,
या पेड़
अपना रक्त धीरे-धीरे
धरती को सौंप देता है?
कभी वहीं
हमने भविष्य का एक छोटा-सा घर बनाया था—
ईंटों से नहीं,
उन शब्दों से
जिन्हें बोलते समय
हम दोनों को लगता था
कि भाषा अमर होती है।
फिर समय आया।
उसने कोई शोर नहीं किया।
बस
तुम्हारे नाम के आगे
किसी और का उपनाम जोड़ दिया,
और मेरे भीतर
एक पूरा नगर
बिना भूकम्प के
ढह गया।
अब भी
तुम्हारे घर के पास से गुज़रता हूँ।
वहाँ
न तुम मिलती हो,
न वह लड़का
जो तुम्हें देखकर
अपनी उम्र से बड़ा हो जाता था।
केवल एक कुत्ता
मुझे पहचानकर
क्षणभर ठहर जाता है।
सोचता हूँ—
क्या स्मृतियाँ
मनुष्यों से पहले
जानवरों के पास शरण ले लेती हैं?
तुम्हारे घर की खिड़की
अब भी वहीं है।
पर परदे बदल गए हैं।
अजीब है—
कभी-कभी
जीवन में सबसे पहले
रंग बदलते हैं,
फिर चेहरे,
फिर संबोधन,
और अंत में
हम स्वयं अपने लिए
अजनबी हो जाते हैं।
मोबाइल की स्क्रीन पर
अब प्रेम
हरे बिंदुओं में जलता है,
नीले टिकों में टूटता है,
और आख़िरी बार
'ऑनलाइन' दिखकर
सदैव के लिए
अनुपस्थित हो जाता है।
किसी ने कहा था—
प्रेम मिलन है।
पर मुझे लगता है,
प्रेम शायद वह है
जो बिछड़ जाने के बाद भी
किसी अनजान मोड़ पर
अचानक
तुम्हारे शहर की हवा बनकर
फेफड़ों में उतर आता है।
मैंने कई बार चाहा
कि तुम्हारे घर के पास से
किसी दूसरी सड़क पर मुड़ जाऊँ।
पर कुछ रास्ते
पैर नहीं चुनते,
वे भीतर का कोई अधूरा वाक्य चुनता है।
तुम्हारे घर के पास
अब एक नया कैफ़े खुल गया है।
वहाँ
नए प्रेमी बैठते हैं।
उनकी हँसी में
मैं अपना बीता हुआ कल नहीं खोजता,
केवल यह सोचता हूँ—
क्या हर पीढ़ी
प्रेम को पहली बार जीती है,
या हर बार
उसी प्राचीन घाव पर
एक नया नाम लिख देती है?
मैं लौट आता हूँ।
पर सच कहूँ—
मैं कभी लौट नहीं पाता।
क्योंकि मनुष्य
घर से नहीं,
अपने अनकहे प्रेम से सबसे अधिक निर्वासित होता है।
और तब
रात के सबसे शांत पहर में
एक प्रश्न
दरवाज़े पर दस्तक देता है—
क्या सचमुच
मैं तुम्हारे घर के पास से गुज़रता हूँ...
या आज भी
तुम ही
मेरे भीतर बने उस घर के पास रहती हो,
जिसका पता
समय कभी बदल नहीं पाया?








