मांँ दुर्गा के नौ रूप - ©डॉ. चंद्रकांत तिवारी - उत्तराखंड प्रांत
Maa Durga always blesses. Navratri is the day of praise and worship of Maa Durga. It is a traditional festival of Hinduism and Hindu religion. Which has cultural and historical importance as well as spiritual and emotional interrelationship.
Navratri is the festival of worship of nine forms of Mahishasura Mardini Goddess Durga Maa. These nine forms are respectively - Shailputri, Brahmacharini, Chandraghanta, Kushmanda, Skandamata, Katyayini, Kalaratri, Mahagauri and Siddhidatri. There are many dimensions in these nine forms of Maa Durga like power and spiritual glory, ascetic character, disciplined life, balanced life dimension, destroyer and creativity, human revival cycle, welfare of the entire universe and human civilization.
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति. चतुर्थकम्।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति, महागौरीति चाष्टमम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना:।।
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मांँ दुर्गा के नौ रूपों से हम क्रमशः इस प्रकार परिचित हैं-- पहली शैलपुत्री, दूसरी ब्रह्मचारिणी, तीसरी चंद्रघंटा, चौथी कूष्मांडा, पांचवी स्कंदमाता, छठी कात्यायिनी, सातवीं कालरात्रि, आठवीं महागौरी और नौवीं सिद्धिदात्री।
1- शैलपुत्री देवी माता --
हिमालय का एक नाम शैलेंद्र या शैल भी है। शैल का मतलब पहाड़ या चट्टान से है। देवी दुर्गा ने पार्वती के रूप में हिमालय के घर जन्म लिया। पार्वती की माता का नाम मैना था। इसीलिए देवी पार्वती का पहला नाम पड़ा शैलपुत्री अर्थात हिमालय की पुत्री। शैलपुत्री होने के नाते मांँ यह सिखाती है कि मानव समाज का चरित्र, कार्य और जीवनशैली पर्वत की तरह अडिग और विशाल होनी चाहिए। शैलपुत्री माता की पूजा अर्चना रोजगार, धन-धान्य और स्वास्थ्य में गुणात्मक वृद्धि करती है।
2- ब्रह्मचारिणी देवी माता --
ब्रह्मा के द्वारा बताए गए मार्ग पर चलाने वाली और ब्रह्मा की प्राप्ति एवं उनके जैसे आचरण को दिलाने वाली, जीवन में नियम, संयम और तत्परता से जीवन की सफलता के सैद्धांतिक सूत्रों को प्राप्त कराने वाली और अनुशासन एवं चरित्र की शक्तियों को संचित करते हुए अलौकिक शक्तियों की आराधना कर मानव कल्याण कराने वाली माता ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना इस दिन को महत्वपूर्ण बनती है। ब्रह्मचारिणी का अर्थ है, जो ब्रह्मा के द्वारा बताए गए सत्य आचरण पर चले। ब्रह्मचारिणी माता की पूजा से कई सिद्धियांँ प्राप्त होती हैं।
3- चंद्रघंटा देवी माता --
जिसके ललाट पर घंटे के आकार का चंँद्रमा सुशोभित है, ऐसी आत्मिक शांति, समृद्धि प्रदान करने वाली माता का नाम चंद्रघंटा है। यह संतुष्टि की देवी है। मनुष्य संतुष्ट होगा तो जीवन भी शांत होगा। अशांत व्यक्ति जीवन में अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाता है। जीवन की आत्मिक सुख शांति समृद्धि के लिए माता चंद्रघंटा की आराधना जरूरी हो जाती है।
4- कुष्मांडा देवी माता --
ऐसा माना जाता है कि कुष्मांडा देवी की मृदु-मधुरिमा मुस्कान से संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई है । भय का नाश करने वाली, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाली, कुष्मांडा देवी का चौथा स्वरूप मानव जीवन के विकास की कथा कहता है। ब्रह्मांड की रचना करने के कारण ही इस देवी का नाम कूष्मांडा पड़ा है। सौहार्दपूर्ण जीवन के लिए कुष्मांडा देवी की पूजा अर्चना महत्वपूर्ण बन गई है।
5- स्कंदमाता --
कार्तिकेय शिव और पार्वती के पुत्र हैं । उनका एक अन्य नाम स्कंद है। कार्तिकेय यानी स्कंद की माता होने के कारण देवी के पांँचवें रूप का नाम स्कंदमाता है ।शक्तिदायक माता की पूजा अर्चना मानव कल्याण के लिए सकारात्मक प्रयास करती है।
6- कात्यायिनी माता --
मांँ कात्यायिनी ऋषि कात्यायन की पुत्री है। कात्यायन ऋषि ने घोर तप किया। तप करने के उपरांत माता दुर्गा ने ऋषि कात्यायन के घर पुत्री रूप में जन्म लिया। कात्यायन ऋषि की बेटी होने के कारण ही देवी का नाम कात्यायिनी पड़ा। देवी अपने भक्तों को रोग, शोक, संताप से मुक्त करती है। देवी की पूजा-अर्चना इस दिन को महत्वपूर्ण बनाती है।
7- कालरात्रि माता --
काल की देवी है मांँ कालरात्रि सभी ऋद्धियांँ और सिद्धियांँ, माता कालरात्रि की अलौकिक शक्तियों, तंत्र-मंत्र, पूजा-प्रतिष्ठा से पूर्ण होती हैं। यह सिद्धियांँ प्राप्त कराने वाली देवी है। काल की देवी जो काल से भी विजय प्राप्त कराने में सक्षम है । जीवन में निरंतर प्रगति पाने के लिए माता कालरात्रि देवी की पूजा अर्चना करनी चाहिए। देवी कालरात्रि की पूजा अर्चना का महत्व इस दिन को विशेष बनता है।
8- महागौरी माता --
माता पार्वती अपने सबसे उत्कृष्ट और अनुपम स्वरूप में महागौरी के रूप में प्रकट हुई हैं। देवी का आठवांँ स्वरूप महागौरी का है। गौरी पार्वती का प्रतीक है और महागौरी मांँ पार्वती का उज्ज्वल, श्वेत, निर्मल स्वरूप है। चरित्र की पवित्रता, निर्मलता और पावनता जीवन में सफलता और निष्कलंक चरित्र निर्माण के लिए माता महागौरी भक्तों को आशीर्वाद देती है। इस दिन माता का स्मरणोत्सव मानव चरित्र को निष्कलंक बनाता है। पापमुक्त , भयमुक्त करता है। जो सच्चे मन से मांँ का स्मरण एवं पूजा अर्चना करता है, माता उस पर अपनी कृपा करती है।
9- सिद्धिदात्री माता--
कैलाशपति, अर्द्धनारीश्वर भगवान शिव भी जिनकी शक्तियों एवं सिद्धियों की स्तुति एवं शक्ति प्राप्त करते हैं, ऐसी देवी मांँ संपूर्ण सिद्धियों की मूल हैं। सिद्धिदात्री माता मानव कल्याण के लिए अवतरित हुई हैं। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए, लक्ष्य भेदने के लिए, नैतिक आचरण एवं जीवन चरित्र को निर्मित एवं सकारात्मक चरित्र निर्माण के लिए माता की आराधना एवं स्तुति वंदनीय है। शिव के अर्द्धनारीश्वर स्वरूप में जो आधी देवी हैं वह सिद्धिदात्री माता ही हैं।
©डॉ. चंद्रकांत तिवारी
उत्तराखंड प्रांत
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