शुक्रवार, 25 जुलाई 2025

विजय दिवस कारगिल - 26 जुलाई - डॉ. चंद्रकांत तिवारी

 

विजय दिवस - कारगिल - 26 जुलाई 

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🇮🇳शहीदों को श्रद्धांजलि -

“जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी…!!”


वीर सिपाही तुम्हें नमन

तुम भारतवर्ष के जीवन धन

शौर्य तुम्हारा अमर रहे 

नाम स्मृति में सदा रहे

नायक हो सरताज बनों

तुम भारत का ताज बनों 

अमर शहीद तुम्हें नमन 

गौरवशाली इतिहास तुम्हें नमन।

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🇮🇳वीरता और विवेक - 

कारगिल विजय दिवस भारत में हर साल 26 जुलाई को मनाया जाता है। यह दिन 1999 में कारगिल युद्ध में भारत की विजय को दर्शाता है। इस दिन भारतीय सेना के उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी जाती है जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।

🪖 कारगिल विजय दिवस -

कारगिल युद्ध मई 1999 से जुलाई 1999 तक चला था।

पाकिस्तान की सेना और घुसपैठियों ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर कुछ प्रमुख चोटियों पर कब्जा कर लिया था।

भारतीय सेना ने "ऑपरेशन विजय" चलाया और भारी संघर्ष के बाद 26 जुलाई 1999 को उन सभी इलाकों को पुनः प्राप्त कर लिया। इस संघर्ष में 500 से अधिक भारतीय सैनिक शहीद हुए।

🇮🇳 26 जुलाई का दिन -

शौर्य, पराक्रम और देशभक्ति की प्रतीक यह विजय भारत की सैन्य क्षमता और हौसले को दर्शाती है।

सैनिकों के बलिदान और समर्पण की याद दिलाता है।

स्कूल, कॉलेज, सेना कार्यालयों और शहीद स्मारकों पर झंडारोहण, भाषण, श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

🇮🇳 कारगिल युद्ध की महत्वपूर्ण बातें जो सभी देशवासियों को याद रहनी चाहिये -


1. युद्ध की अवधि -

कारगिल युद्ध मई 1999 से जुलाई 1999 तक चला।

यह युद्ध 26 जुलाई 1999 को भारत की विजय के साथ समाप्त हुआ। इसी दिन को "कारगिल विजय दिवस" के रूप में मनाया जाता है।

2. युद्ध का कारण -

पाकिस्तान के सैनिकों और आतंकवादियों ने भारतीय सीमा के अंदर कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ की थी।

उनका उद्देश्य था श्रीनगर-लेह राजमार्ग (NH1) को काटना और जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाना।

3. ऑपरेशन विजय -

भारतीय सेना ने “ऑपरेशन विजय” शुरू किया, जिसके अंतर्गत भारतीय क्षेत्र को फिर से अपने नियंत्रण में लिया गया।

यह भारत की सैन्य सफलता और शौर्य का प्रतीक बन गया।

4. भौगोलिक और प्राकृतिक कठिनाइयाँ -

यह युद्ध 16,000 से 18,000 फीट की ऊँचाई पर लड़ा गया।

कठोरतम मौसम, बर्फ और ऊँचाई के कारण यह युद्ध बेहद चुनौतीपूर्ण था।

5. बलिदान और क्षति - 

भारत के 527 से अधिक सैनिक शहीद हुए और लगभग 1300 घायल हुए।

पाकिस्तान की भी भारी हानि हुई, जिसे उसने आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया।

6. अंतरराष्ट्रीय समर्थन -

इस युद्ध में भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन मिला, खासकर अमेरिका, फ्रांस और अन्य शक्तियों का।

पाकिस्तान को युद्ध विराम के लिए वैश्विक दबाव झेलना पड़ा।

7. ऑपरेशन सफ़ेद सागर -

भारतीय वायुसेना ने "ऑपरेशन सफ़ेद सागर" के तहत अहम भूमिका निभाई।

मिराज-2000 जैसे विमान दुश्मन की चौकियों पर हमला करने में उपयोग किए गए, लेकिन एलओसी पार नहीं की गई।

8. कैप्टन विक्रम बत्रा (परमवीर चक्र) -

"ये दिल माँगे मोर !" कैप्टन विक्रम बत्रा का जोश था यह स्लोगन। युद्ध के सबसे बहादुर योद्धाओं में से एक थे। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

9. कारगिल युद्ध (1999) में 4 भारतीय सैनिकों को परमवीर चक्र, भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान से सम्मानित किया गया। ये अमर और वीर सैनिक क्रमशः हैं -

1. कैप्टन विक्रम बत्रा (मरणोपरांत) – 13 जम्मू और कश्मीर राइफल्स

2. राइफलमैन संजय कुमार – 13 जम्मू और कश्मीर राइफल्स

3. ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव – 18 ग्रेनेडियर्स

4. लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय (मरणोपरांत) – 1/11 गोरखा राइफल्स

उपर्युक्त सभी ने अदम्य साहस, वीरता और राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च बलिदान दिया। इनमें से दो सैनिकों को यह सम्मान मरणोपरांत मिला।

10. युद्ध का परिणाम - 

भारत ने लगभग सभी कब्ज़ा की गई चोटियों को पुनः प्राप्त किया।

यह युद्ध भारतीय सेना की शक्ति और संकल्प, शौर्य और पराक्रम का वैश्विक आधार बना।

11. युद्ध की विरासत - 

यह युद्ध भारत की सैन्य क्षमता, एकता और देशभक्ति का प्रतीक बन गया।

हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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वंदे मातरम् - जय हिन्द - जय भारत 

©डॉ. चंद्रकांत तिवारी 

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