रविवार, 9 अगस्त 2026

दीप अभी जलना बाकी है (एक प्रेरणागीत) ©डॉ. चंद्रकांत तिवारी

दीप अभी जलना बाकी है (एक प्रेरणागीत)

©डॉ. चंद्रकांत तिवारी 

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"कि जीवन में परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन, अँधेरी या निराशाजनक क्यों न हों, मनुष्य को अपने भीतर की आशा, साहस और कर्म की अग्नि को कभी बुझने नहीं देना चाहिए। गिरना, असफल होना और संघर्ष करना जीवन का अंत नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की प्रक्रिया है। मनुष्य अपने श्रम, आत्मविश्वास और सतत प्रयास से अपनी राह स्वयं बना सकता है। जीवन की वास्तविक सफलता केवल नाम, धन या यश पाने में नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व को सार्थक बनाने और किसी दूसरे के अँधेरे में प्रकाश बनने में है। अर्थात्—परिस्थितियों के सामने झुकना नहीं, अपने भीतर के दीप को जलाए रखना ही जीवन का सबसे बड़ा संदेश है।"

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रात भले ही गहरी हो,

दीप अभी जलना बाकी है।

टूटी राहों की धूल तले,

पाँव अभी चलना बाकी है।

हार नहीं जीवन की भाषा,

स्वप्न अभी पलना बाकी है—

रात भले ही गहरी हो,

दीप अभी जलना बाकी है।



जिसने काँटों से सीखा है,

वही गुलाब समझ पाएगा,

जो पत्थर से टकराएगा,

वही नदी बनकर जाएगा।

सूनी आँखों के आँगन में

एक प्रभात उतरना है,

अपने भीतर सोई ज्वाला को

फिर से आज सँवरना है।


मुट्ठी में यदि राख मिली तो

अग्नि अभी बची है भाई,

श्वासों के इस छोटे वन में

ऋतु अभी बदली है भाई।

थका हुआ सूरज भी देखो,

फिर आकाश चढ़ता है—

जिसके भीतर स्वप्न जगे हों,

वह कब सच में मरता है!


रात भले ही गहरी हो,

दीप अभी जलना बाकी है।

टूटी राहों की धूल तले,

पाँव अभी चलना बाकी है।



माटी ने कब राज बताया

बीज के भीतर वन होगा,

एक नन्हा-सा जल का कण ही

कब सोचा था सागर होगा।

छोटे-छोटे हाथों में ही

कल की रेखा पलती है,

एक कदम जब सत्य दिशा में

सदियों की राहें ढलती हैं।


मत पूछो आकाश कहाँ है,

पहले धरती थामो तुम,

अपने श्रम की अक्षर-माला से

अपना भाग्य स्वयं लिखो तुम।

समय किसी के द्वार खड़ा हो

ऐसा अवसर कम आता है,

जो क्षण हाथ से निकल गया हो

वह फिर लौट नहीं पाता है।


चलते रहना ही उत्तर है,

रुकना सबसे बड़ा प्रश्न है,

जिसने अपने कर्म जगा लिए

उसके आगे कैसा दंश है!

अँधियारे को दोष न देना,

अपनी लौ पहचानो तुम—

दुनिया बदले या न बदले,

पहले खुद को जानो तुम।



जब अपने ही लोग कहें कि

“तुमसे कुछ भी हो न सकेगा”,

जब हर दरवाज़ा बंद मिले और

मन भीतर से टूटने लगेगा,

तब चुपचाप उठाकर अपने

विश्वासों का टूटा दर्पण,

उसमें अपना चेहरा देखो—

अब भी जीवित है वह स्पंदन।


जिस दिन तुमने भय को अपनी

छाया मान लिया होगा,

उस दिन सूरज सिर पर होकर

भी तुमने तम पाया होगा।

भय तो केवल धुंध है मन की,

छँटते ही सब साफ़ मिलेगा,

जिसको तुमने दूर समझा था

वह भी तुममें पास मिलेगा।


तुम पत्थर हो तो राह बनो,

तुम जल हो तो प्यास बुझाओ,

तुम शब्द हो तो सत्य कहो,

तुम दीप हो तो रात जलाओ।

जीवन केवल साँस नहीं है,

जीवन देना भी होता है—

जो अपने हिस्से का सूरज दे,

वही सचमुच जीता है।



ऊँचे पर्वत पूछ रहे हैं—

“कितनी ऊँचाई चाहोगे?”

नदियाँ कहती हैं—

“कितनी दूर स्वयं से जाओगे?”

पेड़ों ने शाखों पर लिखकर

एक पुराना सत्य बताया—

जितना झुको फल के कारण,

उतना ही आकाश को पाया।


नाम मिले तो ठीक, न मिले तो

कर्म अमर हो जाने दो,

तालियों की चाह छोड़कर

मन में स्वर भर जाने दो।

जो कल के इतिहास लिखेंगे,

उनमें अपना रंग भरो,

पर सबसे पहले आज किसी के

अँधेरे में दीपक बनो।


जीवन की सबसे बड़ी विजय है

किसी हृदय में आशा होना,

अपने बाद भी किसी अधूरे

सपने का विश्वास होना।

धन, पद, यश सब धूल हो जाएँ,

शेष रहे बस इतना धन—

तुम्हारे कारण किसी मनुष्य ने

फिर से मान लिया हो जीवन।



और अगर कभी ऐसा आए

जब सब कुछ बिखरा-बिखरा हो,

आँखों में बादल हों लेकिन

अंदर कोई दीप न ठहरा हो,

तब धरती पर माथा रखकर

थोड़ी देर ठहर जाना तुम,

अपने भीतर की धड़कन से

एक बार फिर मिल जाना तुम।


जीवन कोई सीधी रेखा

नहीं—घुमावों का उत्सव है,

गिरना भी निर्माण का पहला

अक्षर है, संघर्ष महोत्सव है।

जिसने गिरकर उठना सीखा,

उससे बड़ा विजेता कौन?

जिसने आँसू पीकर हँसना सीखा,

उससे बड़ा देवता कौन?


चल, अपने भीतर लौट चलें,

फिर अपना आकाश गढ़ें,

जहाँ अँधेरे हार मान लें,

ऐसा एक प्रकाश गढ़ें।

कल की चिंता कल पर छोड़ें,

आज नया इतिहास लिखें—

एक मनुष्य के जागने से

सौ सोए विश्वास लिखें।



रात भले ही गहरी हो,

दीप अभी जलना बाकी है।

सूखी धरती के सीने में

मेघ अभी पलना बाकी है।

टूटी नाव किनारे बैठी—

सागर अभी बुलाता है,

थका हुआ यह मन भी सुन ले—

जीवन गीत सुनाता है।


हार नहीं अंतिम सच है,

जीत अभी मिलना बाकी है।

मुट्ठी भर इस जीवन में

युग को बदलना बाकी है।

तू बस अपने पथ पर चल,

इतना ही संकल्प रख—

रात भले ही गहरी हो,

दीप अभी जलना बाकी है।


दीप अभी जलना बाकी है…




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