Daman
रविवार, 18 सितंबर 2022
महंगें शब्द सस्ते लोग डॉ चंद्रकांत तिवारी
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अपनी इज़्ज़त को ईमानदारी के चादर पर लपेट कर चलता हूंँ ऊंँची-नीची पथरीली राहों पर पैदल अकेले ही चलता हूंँ। जानता हूंँ ईमानदारी एक महंगा शौक...
अपनी मिट्टी अपने शब्द - डॉ चंद्रकांत तिवारी
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घर के दरवाज़ पर छोटा-सा ताला है घर के भीतर बड़े-बड़े बक्से हैं बक्सों में लगा बड़ा-सा ताला है भाषा की दौड़ में-कई भाषाएं दौड़ रही हैं...!...
Go on continuously -Dr. C K TEWARI
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A long road miles of travel Two small steps. desire for will green grass and some pebbles somewhere thorny path All companions are of...
लहरों का अनुशासन -कविता- डॉ चंद्रकांत तिवारी
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कुछ गहरा और कुछ कम गहरा लहराते हुए पानी के बुलबुले उठती पानी की तरंगे और गहराई में खो जाती तिरंगे निरंतर गतिमान नदी का कितना सुंदर अनुशासन ...
The discipline of the waves ©Dr. Chandra Kant Tewari
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The discipline of the waves ©Dr. Chandra Kant Tewari some deep and some less deep waving water bubbles rising water waves And the water g...
बीती रात एक राजनीतिक स्वप्न डॉ चंद्रकांत तिवारी
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कलम उठाने से बनता तो मैं भी बन जाता लोकनायक लोक-धर्म साहित्य-शास्त्र की नींव का पत्थर कहलाता खादी-कुर्ता पहनकर टोपी घर-घर में भी चिल्लाता ...
शब्दों का कारवां चंद्र कांत
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भौतिक जगत के क्रियाकलापों से व्यक्ति सभ्य होता है परंतु आत्मबल हृदय को संस्कारित करने से ही प्राप्त होता है। आत्मिक मूल्य व्यक्ति के जीवन म...
Feeling -poem Dr. Chandra kant Tewari
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when a deep sleep breaks sleep dreams are broken we return to the real world because we are still alive first morning thank god There is s...
एहसास एक शब्द सीमा - डॉ. चंद्रकांत तिवारी
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कभी चांँदनी की रोशनी कभी दिन का उजाला है कभी बोलती हैं आँखें कभी ज़ुबान पर ताला है समंदर-सी लहरों में एक ख़्वाब पाला है। रास्ता है बेखबर ...
अल्फाजों में कविता- डॉ. चंद्रकांत तिवारी
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शहर के किसी कोने में शोर हुआ है वक्त निकालकर सुनना किसी अपने की चीखने की आवाज सुनाई देती है यहां कानों में अल्फाजों में कविता बोलती है कहीं...
हिन्दी पखवाड़ा कार्यक्रम डॉ. चंद्रकांत तिवारी
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*हिन्दी पखवाड़ा* 1 सितंबर से 15 सितंबर 16 सितंबर से 30 सितंबर । भारत सरकार की राजभाषा नीति/नियमों के अनुसरण में राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्...
रविवार, 11 सितंबर 2022
आंँखों पर हिमालय- कविता डॉ. चंद्रकांत तिवारी
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आंँखों पर हिमालय- डॉ. चंद्रकांत तिवारी - उत्तराखंड प्रांत पैरों से मस्तक की ओट किए गंगा पर्वत भी चढ़ती है मस्तक की शीर्ष जटाओं से गंगा चर...
सोमवार, 21 फ़रवरी 2022
*(21 फरवरी)-अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस* के अवसर पर-©चंद्रकांत
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*(21 फरवरी)-अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस* के अवसर पर- ©चंद्रकांत यूनेस्को मातृभाषा को विशेष स्थान देता है। यह 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस ...
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